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वैवाहिक जीवन को सुखी बनाने का उपाय

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coupleवैवाहिक जीवन को सुखी बनाने के लिए आवश्यक है कि स्त्री-पुरुष के आपसी संबंध ठीक हों। स्त्री-पुरुष के आपसी संबंधों के ठीक रखने का सबसे बड़ा साधन है सेक्स। सेक्स के द्वारा एक-दूसरे को खुश और प्रसन्न रखा जा सकता है लेकिन सेक्स के द्वारा आपसी संबंध ठीक रखने के क्रम में इस बात को याद रखना अति आवश्यक है कि सेक्स संबंधों के द्वारा शारीरिक संतुष्टि की अपेक्षा मानसिक संतुष्टि अधिक मिले सके। वर्तमान समय में लोग सेक्स के रहस्यमय रूप को ही बेहतर मानते हैं। इसलिए आज भी लोग सेक्स संबंधी जानकारी को चोरी-छिपे तरीके से प्राप्त करते हैं। लेकिन धीरे-धीरे लोगों के सोच में परिवर्तन होने लगा है और वे सेक्स शिक्षा को एक आवश्यक विषय मानने लगे हैं। आज लोग सेक्स की जानकारी और ज्ञान को सुखी जीवन व्यतीत करने का एक जरूरी साधन मानने लगे हैं।

वर्तमान समय में सेक्स शिक्षा की महत्वपूर्णता को समझने के बाद भी लोगों में सेक्स विज्ञान के प्रति अज्ञानता है विशेषकर लड़कियों में। बहुत सी लड़कियां वैवाहिक जीवन के बारे में बिल्कुल अज्ञान होती हैं। ऐसी लड़कियां वैवाहिक जीवन की शुरुआत में सेक्स की आवश्यकता को जानती तो है लेकिन वह उन जरूरतों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नहीं समझ पाती और वैवाहिक जीवन के एक बोझ के रूप में मानने लगते हैं। स्त्री में उत्पन्न इस तरह की भावना ही वैवाहिक जीवन को कष्ट कर देती है। अतः लड़कियों के अन्दर उत्पन्न इस तरह की सोच को बदलना चाहिए और ऐसी परिस्थिति से बचने के लिए स्त्री-पुरुष दोनों को ही एक-दूसरे की मानसिकता को समझना चाहिए।

सेक्स ज्ञान के बारे में पुरुषों की स्थिति भी स्त्रियों की तरह ही है। पुरुषों के मन में भी वैवाहिक जीवन के बाद सेक्स संबंध और स्त्री के बारे में अनेक तरह के अवैज्ञानिक विचार और गलत धारणाएं बनी रहती हैं। पुरुषों के मन में इस तरह के विचार न केवल वैवाहिक जीवन को प्रभावित करते हैं बल्कि शारीरिक क्षमता व मानसिकता को भी प्रभावित करती हैं।

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में अपने आपको एकाग्र करने की शक्ति अधिक होती है। अक्सर देखने में आया है कि स्त्रियां एक ही समय पर अपने मस्तिष्क को दो अलग-अलग कार्यों में लगा सकती हैं जैसे- एक साथ खाना बनाने के साथ-साथ बच्चे को स्कूल के लिए तैयार करना, पत्रिकाएं पढ़ते हुए बच्चों का होमवर्क कराना, कपड़े धोते समय दूसरों की बातें सुनना आदि। इस तरह स्त्री एक समय में दो कार्य करने में समर्थ होती है। इसके विपरीत पुरुष एक समय में एक ही कार्य करता है और यदि उस कार्य के बीच कोई बाधा उत्पन्न कर दे तो वह गुस्सा हो जाता है। उसकी बातों के बीच यदि कोई बोल दे तो भी वह गुस्सा हो जाता है। स्त्री-पुरुष दोनों के स्वभाव में इस तरह की भिन्नता होने का एक मनोवैज्ञानिक कारण है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार मनुष्य का मस्तिष्क दो भागों में बंटकर कार्य करता है- बायां भाग जो बातचीत की क्रिया पर नियंत्रण रखता है और दायां भाग जो स्थानीय या दृष्टिगत कार्य को नियंत्रित करता है। पुरुष एक समय में अपने मस्तिष्क का एक अर्धगोलाक (हेमिस्फियर) ही प्रयोग में लाता है जिससे पुरुष एक समय में एक ही कार्य पर ध्यान दे पाता है। लेकिन स्त्री के मस्तिष्क के दोनों भाग एक ही समय पर कार्य करते हैं जिससे स्त्री एक समय में दो या अधिक कामों को कर सकने में सक्षम होती है। यही कारण है कि सेक्स क्रिया के दौरान स्त्री के लिए बातचीत करना आसान होता है परंतु हो सकता है कि पुरुष उस समय स्त्री द्वारा कही गई बातों पर कोई प्रतिक्रिय न कर पाए या फिर स्त्री द्वारा कही गई बात को न सुन पाए क्योंकि पुरुष सेक्स के समय मस्तिष्क के केवल दाएं हिस्से का ही उपयोग कर रहा होता है। अतः स्त्री को उन क्षणों में पुरुष के व्यवहार को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं होना चाहिए तथा पुरुष द्वारा कोई प्रतिक्रिया न दिखाने पर निराश भी नहीं होना चाहिए।

कुछ अन्य मनोवैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि विपरीत लिंग के प्रति पुरुष अधिक आकर्षित होते हैं जबकि पुरुष की ओर स्त्रियां शब्दों द्वारा अभिमुख होती हैं। यही वजह है कि बचपन से ही लड़के कामुक पत्रिकाएं, नग्न चित्र, मूर्तियों तथा फिल्मों आदि को देखने में रुचि रखते हैं और लड़कियां प्रेम कहानियां व रोमांटिक उपन्यास पढ़ने या पारिवारिक फिल्में या ड्रामे देखना अधिक पसंद करती हैं। लड़कियों को नग्नता अधिक पसंद नहीं होती। पति को पत्नी का बाहरी रूप ही आकर्षित करता है।

पुरुषों को स्त्रियों के साथ हंसना, बोलना, मजाक करना और छेड़छाड़ करना अच्छा लगता है। लड़कियों को बचपन से ही हंसने, बोलने आदि की शिक्षा दी जाती है। परिवार में स्त्री की गंभीरता और शालीनता की सराहना की जाती है। पुरुष जब स्त्री से छेड़छाड़ और हंसी मजाक करता है तो उससे मानसिक तनाव  दूर होता है। पति जब पत्नी से हंसी-मजाक करता है या उसे खुश करने के लिए किसी प्रकार की बातें करता है तो उसके छेड़छाड़ व बातों का पत्नी द्वारा किसी प्रकार की प्रतिक्रिया न मिलने पर पति यह समझ बैठता है कि पत्नी उसे पसंद नहीं करती है या वह स्वयं को उससे बेहतर मानती है। वह सोचता है कि पत्नी उसके क्रियाकलापों का अनुमान कर रही है। यह अनुमान किए जाने का भाव पुरुष के अन्दर आत्महीनता का बोध करा सकता है। अतः स्त्री-पुरुष दोनों को एक-दूसरे प्रति आकर्षण और प्यार बढ़ाना चाहिए।

वैवाहिक जीवन को अच्छा बनाये रखने के लिए आवश्यक है कि दोनों के बीच प्यार और सेक्स संबंध का संतुलन बना रहे। कभी-कभी ऐसा होता है जब स्त्री सेक्स संबंध बनाने से मना कर देती है तो इसका परिणाम यह होता है कि पुरुष स्वयं को पूरी तरह से स्त्री द्वारा अस्वीकृत समझ बैठता है। इसका कारण यह है कि स्त्री-पुरुष के बीच सेक्स संबंध संवेदनात्मक भावना के साथ स्वीकार किए जाने का विश्वसनीय प्रतीक है। वैवाहिक जीवन में हमेशा अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि स्त्री-पुरुष के बीच सेक्स संबंध अच्छे हो। पति द्वारा छूने, बाते करने और प्यार करने का अर्थ यह नहीं है कि पुरुष सेक्स की इच्छा से ही ऐसा करता है बल्कि यह उसके मन में पत्नी के प्रति प्यार की भावना भी हो सकती है। पत्नी की थोड़ी सी नासमझी, थकान या थोड़ा-सा रूखापन पुरुष के मन में गलत भावनाओं को पैदा कर सकता है और उनके सुखी वैवाहिक जीवन को कष्टकारी बना सकता है। अतः किसी काम को मना करते समय चेहरे पर कभी भी ऐसे भाव पैदा न करें जिससे पति के मन में किसी प्रकार की गलत भावनाएं पैदा हो।

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