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श्री महाकालेश्वर

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Mahakaleshwar Jyotirlinga Ujjain
Mahakaleshwar Jyotirlinga Ujjain
Mahakaleshwar Jyotirlinga Ujjain

इस भूमण्डल के अधिपति, भूतों के राजा बाबा महाकाल जिनकी इच्छा के बिना इस पृथ्वी का संतुलित रहना असंभव हैं बाबा महाकाल जिनका बारह ज्योतिर्लिंग  में तृतीय क्रम में उल्लेख आता हैं उनका दर्शन, स्मरण किये बिना कोई भी मनुष्य मोक्ष की प्राप्ति नहीं कर सकता, अनादिकाल से नित्य सूर्योदय से पूर्व ब्रम्ह मुहूर्त में बाबा महाकाल को भस्म अर्पित कि जाती है | मान्यता है कि भोलेनाथ तो अत्यंत ही भोले है स्वर्ण, रजत आदि तो विलासिता की वस्तुऐ है उन्हें तो बस चिता की भस्म ही प्रिय है वह ही उनका श्रृंगार है ।

प्रातः काल जब बाबा की भस्मार्ती होती है ऐसा लगता है मानो संसार में सम्पूर्ण वस्तुऍ क्षणभंगुर है सिर्फ चेतन है तो बाबा महाकाल, ऐसा आनंद की अब तो मोक्ष निश्चित है । इसके पश्चात दिन भर बाबा का अभिषेक पूजन होता है तथा रात्रि में शयन आरती कर पट बंद किये जाते है । देश – विदेश से आने वाले श्रद्धालु बाबा महाकाल का पंचामृत पूजन रुद्राअभिषेक, ब्राह्मणों के द्वारा लघुरुद्र व सकल संकटो के निवारण के लिए, असाध्य रोगों से रक्षा के लिए व समस्त मनोकामनाओं कि पूर्ति के लिए महामृत्युंजय के जाप इत्यादि विशेष से करवाते है और मनवांछित फल की प्राप्ति पाते हैं साथ ही यहाँ अनेक प्राचीन मान्यताओं से जुड़े पौराणिक मंदिर व दार्शनिक स्थल है जिनका वेद, पुराणों, धार्मिक कथाओं में प्रमुखता से वर्णन है जिनमे कुम्भ के स्नान का प्रमुख धार है जिसे –

रामघाट  कहते है, अमृत की बून्द इसी स्थान पर गिरी थी तथा त्रैतायुग में भगवान श्रीराम ने यहाँ पर आकर अपने पूर्वजों के लिए पिण्डदान किया था ।

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