यौनपरक सम्भोग

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male-femaleयौनपरक सम्भोग किसे कहते हैं?

जब लड़के और लड़की में परस्पर यौन आकर्षण होता है तभी सम्भोग का आरम्भ होता है। जब लड़के का खड़ा लिंग लड़की की योनि के अन्दर जाता है तभी यौनपरक सम्भोग होता है।

क्या यौनपरक सम्भोग दुखता है?
यदि लड़की में यौनपरक उत्तेजना हो और उसकी योनि विश्राम में हो तो वह अपने आप इतनी भीग जाती है कि लड़के का लिंग बिना दुखाये अन्दर चला जाए। योनि बहुत लचीली होती है और सम्भोग के समय, सामान्यतः लिंग का कुछ अंश ही योनि के अन्दर जाता है। यदि सम्भोग के दौरान दुखे तो इसका अर्थ है कि यौन उत्तेजना के बाद भी लड़की के शरीर में पर्याप्त प्राकृतिक स्नेह निःसृत नहीं हुआ अथवा जब दोनों साथी यौनपरक संक्रमण से पीड़ित होते हैं तब ऐसा होता है।

दर्द भरे सम्भोग का कारण बनने वाली योनिपरक शुष्कता से महिला कैसे निपट सकती है?
किसी न किसी समय हर महिला योनिपरक शुष्कता का अनुभव करती है। आजकल बाजार में योनि को अनेकानेक स्नेहिल करने वाले पदार्थ मिलते हैं जिन का प्रयोग योनि की शुष्कता को दूर करने के लिए किया जा सकता है।

औरत की योनि में वीर्य के निष्कासन के बाद वीर्य का क्या होता है?
क्या वह निष्प्राण होने तक उस में रहता है या बाहर बह जाता है? यदि वह अन्दर रहता है तो निष्प्राण हो जाने पर उसका क्या होता है।

योनि में वीर्य के निष्कासन के बाद, वह जोनि में ऊपर की और जाता है, ग्रीवा से होते हुए अण्डवाही ट्यूबों में चला जाता है या बाहर बह जाता है। महिला के खड़े होने पर सारा वीर्य बाहर बह जाता है। जो वीर्य शरीर में रह जाता है वह लगभग तीन से सात दिन तक सजीव रहता है। यदि कोई महिला गर्भधारण करना चाहती है तो उसे सम्भोग के उपरान्त कम से कम बीस मिनट तक खड़ नहीं होना चाहिए।

क्या यौनपरक सम्भोग के लिए कोई “सुरक्षित समय” भी होता है?
यदि आप गर्भधारण करने या यौनपरक संक्रामक रोगों से बचना चाहते हैं तो असुरक्षित यौन सम्बन्धों के लिए कोई सुरक्षित समय नहीं होता। जब भी कोई संक्रमित व्यक्ति किसी असंक्रमित व्यक्ति के साथ यौन सम्भोग करता है तो एस टी डी संक्रमित हो जाते हैं, गर्भ धारण की सम्भावना भी रहती है यहां तक कि अगर लड़की को माहवारी हो रही हो तब भी सम्भावना रहती है। हालांकि सामान्यतः औरतें हर महीने (माहवारी चक्र के बीचों बीच) कुछ दिनों के लिए उर्वर होती हैं परन्तु कई औरतों में इसे जान सकने का कोई निश्चित तरीका नहीं होता। वीर्य शरीर के अन्दर काफी दिनों तक सजीव रह सकता है, अभिप्राय यह है कि सम्भोग के काफी दिन बाद भी स्त्री गर्भवती हो सकती है। यदि उसकी महवारी अनियमित हो तो सुरक्षित दिनों का पता चलाना विशेषकर कठिन हो जाता है।

क्या पहली बार सम्भोग करने पर भी कोई महिला गर्भ धारण कर सकती है?
हाँ, लड़की गर्भ धारण कर सकती है?

क्या माहवारी के दौरान सम्भोग करने से लड़की गर्भधारम कर सकती है?
हां, माहवारी के दौरान सम्भोग करने से लड़की गर्भधारण कर सकती है।

एक बार के सम्भोग से गर्भधारण की कितनी सम्भावना रहती है?
एक बार असुरक्षित सम्भोग से गर्भधारण की सम्भावना व्यक्ति व्यक्ति के साथ बदलती है तथा की माहवारी चक्र की कौन सी स्थिति है इस पर निर्भर करता है। अण्डोत्सर्ग के आसपास के समय में सम्भावना सब से अधिक रहती है अर्थात माहवारी चक्र के 14 वें दिन (रक्तस्राव रूकने के 7 से 10वें दिन)। इन दिनों में एक बार सम्भोग करने से औसतन एक तिहाई औरतें गर्भवती हो जाती हैं।

यदि कोई पुरूष वीर्य निष्कासन से पहले अपने लिंग को निकाल ले या पूरी तरह अन्दर न डाले तो क्या फिर भी औरत गर्भवती हो सकती है?
दुर्भाग्य से, अगर कोई पुरूष अपने लिंग को पूरी तरह न डाले या वीर्य निष्कासन के समय बाहर निकाल लें, औरत तब भी गर्भधारण कर सकती है। ऐसा इसलिए कि सम्भोग से पहले या दौरान में लिंग से जो तरह पदार्थ निकलता है उस में शुक्राणु हो सकते है। यदि यह तरल पदार्थ औरत की योनि के अन्दर या आसपास पहुँच जाता है तो अन्दर भी जा सकता है और महिला गर्भधारण कर सकती है।

झिल्ली क्या होती है? क्या झिल्ली का सही होना कुंआरेपन की निशानी है?
यह पतला सुरक्षा परक लचीला मैमब्रन या त्वचा की एक स्ट्रिप (पट्टी) होती है जो कि योनि द्वार को थोड़ा ढक देती है। जब आप किशोरावस्था पर पहुंचती है यह झिल्ली आसानी से खिंचने वाली हो जाती है, पर यह झिल्ली कई तरीकों से फट सकती है जैसे कि साईकल चलाने से। यदि किसी की झिल्ली सही न हो तो इसका यह अर्थ नहीं है कि लड़की कुँआरी नहीं है। याद रखें, जब तक आप यौनपरक सम्भोग नहीं करतीं आप कुँआरी हैं।

यौनपरक अभिविन्यास क्या होता है?
यौनपरक अभिविन्यास का अभिप्राय है किसी व्यक्ति का जेन्डर (स्त्री-पुरूष) के प्रति आकर्षण। सामान्यतः अनेक प्रकार के यौनपरक अभिविन्यास का वर्णन मिलता है 

(1) हीटिरोसैक्सुअल – विषमलिंगकामी – विषमलिंगकामी व्यक्ति भावुकता एवं शारीरिक रूप से विषम लिंग वाले व्यक्ति के प्रति आकर्षित होते हैं। विषमलिंग पुरूष स्त्री के प्रति और स्त्रियां पुरूष के आकर्षित होती हैं। इन्हें कभी कभी ‘सीधा’ भी कहा जाता है।

(2) होमोसैक्सुअल – समलिंगी – होमोसैक्सुअल लोगों का भावपूर्ण एवं शारीरिक आकर्षण अपने ही जेन्डर के लोगों के प्रति होता है। जो औरतें दूसरी औरतों के प्रति आकर्षिक होती हैं उन्हें लेसबियन कहते हैं, जो पुरूष दूसरे पुरूषों के प्रति आकर्षित होते हैं उन्हें ‘गे’ कहा जाता है (दोनों जेन्डर के समलैंगिकी लोगों के वर्णन के लिए भी कई बार ‘गे’ शब्द का प्रयोग किया जाता है।)

(3) बाईसैकसुअल – उभयलिंगी – ऐसे लोग दोनों जेन्डर के लोगों के प्रति भाव एवं शरीर से आकर्षित होते हैं

लड़का/लड़की कब सम्भोग करना शुरू कर सकते हैं।
सम्भोग का आरम्भ करने के लिए कोई निश्चित सही उम्र नहीं है। महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या यह आपके लिए सही समय है। यह इस पर भी निर्भर करता है कि आप सम्भोग करने का क्या अर्थ लेते हैं बिना यौनपरक सम्भोग के भी कई ऐसे तरीके हैं जिससे आप सैक्सुअल सुख पा और दे सकते हैं। एक दूसरे को सन्देश भेजना, चूमना, आलिंगन में लेना भावभीना हो सकता है। यह प्यार को बांटने और व्यक्त करने का तरीका है।

कामोन्माद की चरम स्थिति क्या होती है?
जब कामपरक उत्तेजना भड़कती है और अपने चरम शिखर पर पहुंच जाती है तो उसे चरम स्थिति या होना कहते हैं जब कोई लड़का चरम स्थिति पर पहुंचता है तो स्खलन होता है। इस का अर्थ है कि वीर्य से मिश्रित होकर उसके शुक्राणु चिपचिपे सफेद तरल पदार्थ के रूप में उसके लिंग के अन्तिक छोर से बाहर निकलते हैं। लड़के के स्खलन के बाद लिंग का खड़ापन कम हो जाता है और उसे कुछ समय के लिए रूकना पड़ता है। जब लड़की चरम स्थिति पर पहुँचती है तो उसकी योनि बहुत गीली हो जाती है परन्तु वह जब तक चाहे कामलीला का आनन्द ले सकती है। कुछ लड़कियां बिना रूके एक से अधिक बार चरमस्थिति का अनुभव कर सकती हैं।

क्या चरमस्थिति का अनुभव न पाने में कोई अप्राकृतिक बात है?
यदि कोई व्यक्ति चरमस्थिति का अनुभव नहीं कर पाता तो इसका अर्थ यह नहीं है कि कुछ गलत है। वस्तुत चरमस्थिति तक पहुंचने की चिन्ता या परेशान होने से व्यक्ति को इस तक पहुंचने में बाधा देती है।

स्त्री और पुरूष की चरमस्थिति में क्या अन्तर होता है?
चरमस्थिति में सबसे साफ स्पष्ट अन्तर तो यहीं है कि पुरूष की चरमस्थिति वीर्य स्खलन से जुड़ी होती है। स्खलन प्रक्रिया में वीर्य मूत्र नली में स्खलित होता है और श्रेणि प्रदेश की मांसपेशियों में लयबद्ध संकुचन द्वारा प्रेरित होकर वह वीर्य लिंग से बाहर आ जाता है। औरत की चरमस्थिति में लयबद्ध संकुचन श्रोणि प्रदेश की मांसपेशियां और योनि की दीवारों के बीच साथ साथ होता है।

गुदापरक सम्भोग क्या होता है?
गुदापरक सम्भोग तब होता है जब कोई लड़का अपने लिंग को दूसरे लड़के या लड़की की गुदा और मलद्वार के अन्दर डालता है।

क्या गुदापरक सम्भोग से कोई लड़की गर्भवती हो सकती है?
गुदापरक सम्भोग से सामान्यतः तो कोई लड़की गर्भवती नहीं हो सकती, हां अगर शुक्राणु मलद्बार से बहकर योनि में प्रवेश कर जायें तो हो भी सकती है। अतः लम्बी अवधि तक गर्भ से बचने के लिए गुदारपरक सम्भोग को सर्वोत्तम नहीं माना जा सकता।

मौखिक सम्भोग (सेक्स) क्या होता है?
मौखिक सम्भोग तब होता है जब कोई व्यक्ति दूसरे के लिंग अथवा योनि को चाटता या चुसता है। किसी लड़के से मौखिक सम्भोग करके, अगर उसके वीर्य को निगल भी लिया जाये तो भी कोई लड़की उससे गर्भवती नहीं हो सकती।

क्या शुक्राणु कपड़ों से पार जा सकते हैं?
नहीं, सामान्यतः कपड़े शुक्राणुओं के अवरोधक होते हैं।

एक महिला जिसकी योनि में यीस्ट इन्फैक्शन हो क्या उसके साथ मौखिक सम्भोग करने पर पुरूष को भी यीस्ट इन्फैक्शन हो सकती है?
हां, ऐसा हो सकता है, खमीर जो कि फंगस जैसा होता है वह एसिडिक वातावरण में पनपता है जैसे कि योनि। मुख के अन्दर भी योनि जैसा ही वातावरण होता है। मुख में होने वाली यीस्ट इंफैक्शन को भ्रंश कहते हैं। यदि आप के गले पर कोई सफेद झिल्ली सी आ जाए, या गले के पीछे सफेद धब्बे हों या मुख के अन्दर सफेद दाग हो जाए तो वे मुख की यीस्ट इन्फैक्शन के लक्षण होते हैं – तो डॉक्टर से तुरन्त मिलें। चिन्ता न करें, इसका इलाज हो सकता है।

नपुंसकता क्या है?
यौनपरक सम्भोग में पर्याप्त आन्न्द पाने के लिए जब पुरूष का लिंग खड़ा नहीं हो पाता या खड़ा होकर रूक नहीं पाता तो उसे नपुंसकता कहते हैं।

नपुंसकता के कारण क्या होते हैं?
नपुंसकता निम्नलिखित कारणों से हो सकती है। 

  1. मानसिक दबाव और अवसाद 
  2. शराब / ड्रग का नशा
  3. धुम्रपान 
  4. मधुमेह 
  5. हृदय रोग 
  6. उच्च रक्त चाप
  7. रक्त चाप, दबाव और पाचक रोगों में प्रयुक्त कुछ दवाइयां।

नपुंसकता का उपचार कैसे होता है?
नपुंसकता का उपचार करने के लिए 

  1. शराब और सिगरेट छोड़ दें। 
  2. (वियाग्रा) सिल्डेनाफिल टैस्टोस्टरोन जैसे ड्रग….. 
  3. मूत्रनली या लिंग में दवा का इंजैक्शन लगाये 
  4. लिंग को खड़ा करने वाले उपकरणों का प्रयोग करें। 
  5. शल्य चिकित्सा 
  6. मनोचिकित्सा।

वियाग्रा कितनी प्रभावशाली होती है?
शारीरिक अथवा मानसिक कारणों से लिंग के खड़े न हो पाने के रोग में वियाग्रा का उपयोग किया जाता है। जिन पुरूषों को हृदय तंत्री का रोग, मौल्लिटस मधुमेह, उच्च रक्त चाप, अवसाद हृदय की बाईपास सर्जरी हो चुकी हो और जो पुरूष अवसाद मुक्ति या रक्त चाप से मुक्ति देने वाली दवाएं लेते हैं उन में लिंग को खड़ा करने के लिए इसे प्रभावशाली माना जाता है। चिकित्सा प्रयोगों में, देखा गया है कि मधुमेह वाले 60 प्रतिशत और बिना मधुमेह वाले 80 प्रतिशत लोगों को वियाग्रा से लिंग के खड़े होने में बेहतर मदद मिलती है।

वियाग्रा कितनी मात्रा में लेनी चाहिए?
वियाग्रा देते समय डॉक्टर रोगी की उम्र स्वास्थ्य की सामान्य स्थिति और जो दवाएं वह ले रहा हो उन सब का ध्यान रखता है। प्रारम्भ करने की अधिकतर पुरूषों में मात्रा 50 मि.ग्रा. होती है, पर सह प्रभावों एवं प्रभविषुणता को देखते हुए डॉक्टर मात्रा को बढ़ा या घटा सकता है। अधिक से अधिक 100 मि.ग्रा. प्रत्येक चौबीस घन्टे की अवधि में संस्तुष्ट की जाती है।

वियाग्रा किस प्रकार दी जानी चाहिए?
सिल्डेनाफिल 15, 50 और 100 मि.ग्रा. की मौखिक गोलियों में उपलब्ध है। सम्भोग परक गतिविधि के प्रारम्भ के एक घन्टा पहले इसे लेना चाहिए। श्रेष्ठ परिणाम के लिए इसे खाली पेट लेना चाहिए क्योंकि खाने के बाद, यदि गरिष्ठ भोजन किया हो तो इसका प्रभाव और स्राव घट जाता है।

वियाग्रा के सह प्रभाव क्या होते हैं?
बिना विशेष सह प्रभावों के वियाग्रा अधिकतर लोगों को लाभ पहुंचाती है। जो सहप्रभाव सामने आये हैं वे बहुत हल्के हैं जिसमें सिर दर्द, पानी-पानी हो जाना, नाक बन्द होना, घबराहट, गैस बनना डॉयरिहा और दृष्टि की असामान्यता (नीला नीला दिखना या चमचमाहट शामिल है।

नपुंसकता का उपचार करने के लिए लिंग या मूत्र नली में जो दवाईयां इंजैक्शन द्वारा दी जाती हैं वे कितनी प्रभावसाली होती हैं?
खड़ेपन को बनाने और बनाये रखने के लिए लिंग में सीधे दवाइयां इंजेक्शन द्वारा दी जा सकती है। हालांकि ऐसे इंजैक्शन प्रभावशाली हो सकते हैं पर उनका बहुत उपयोग नहीं किया जाता क्योंकि वे बहुत पीड़ादायक होते हैं इस से लिंग में घाव भी हो सकते हैं और इस में छह घन्टे से भी अधिक लम्बे समय तक लिंग के खड़े रहने और पीड़ा देने का खतरा भी रहता है। लिंग को खड़ा करने के लिए मूत्र नली में दवा की गोली भी डाली जा सकती है। यह विधि भी अधिक लोकप्रिय नहीं है क्योंकि कई बार इससे लिंग में पीड़ा या शुक्राणुकोश में पीड़ा, मूत्रनली से हल्का रक्तस्राव, चक्कर आना और सम्भोग की साथिन की योनि में जलन जैसे प्रभाव पड़ सकते हैं।

वैक्युम यन्त्र क्या होते हैं?
मशीनी वैक्युम यन्त्र द्वारा लिंग के आसपास खालीपन का दबाव बनाया जाता है जिस से वह रक्त को लिंग में खींचता है, उसे बड़ा करता है और खड़ा करता है जिससे खड़ापन आ जाता है।

नपुंसकता के सन्दर्भ में कौन सी सर्जरी की जाती है?
नपुंसकता से ग्रस्त बहुत से पुरूषों में खड़ापन लाने के लिए परौसथीसिस नामक न डाले जाने वाले एक यन्त्र का प्रयोग किया जाता है।

मनोवैज्ञानिक थैरेपी क्या होती है?
विशेषज्ञ नपुंसकता का उपचार मनोविज्ञान आधारित तकनीक से करते हैं जिससे व्यक्ति की सम्भोग सम्बन्धी परेशानियां दूर हो जाती है। रोगी की साथी इस तकनीक को क्रियान्वित करने में मदद दे सकती है जिसमें अंतरंगता का विकास और उत्तेजक प्रेरणा भी शामिल है। जब शारीरिक नपुंसकता का उपचार होता है उस समय भी ऐसी तकनीकें चिन्ता को दूर करने में मदद देती हैं।